ग्रामीण अनुसूचित जाति की महिलाओं में शिक्षा एवं आर्थिक सशक्तिकरण का सामाजिक एवं राजनीतिक जागरूकता पर प्रभाव: दुर्ग जिले के विशेष संदर्भ में
Keywords:
मुख्य शब्द: अनुसूचित जाति महिलाएँ, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता, राजनीतिक जागरूकता, ग्रामीण समाज, दुर्ग जिला, महिला सशक्तिकरण।Abstract
ग्रामीण अनुसूचित जाति की महिलाएँ भारतीय समाज की उस सामाजिक श्रेणी का प्रतिनिधित्व करती हैं जहाँ जाति, लिंग, ग्रामीणता और आर्थिक स्थिति परस्पर जुड़कर अवसरों तथा जीवन-अनुभवों को प्रभावित करते हैं। शिक्षा महिलाओं में ज्ञान, आत्मविश्वास, अधिकार-बोध और सार्वजनिक संस्थाओं से संवाद की क्षमता विकसित करती है, जबकि आर्थिक सशक्तिकरण आय, बचत, आजीविका, वित्तीय निर्णय और संसाधनों तक पहुँच के माध्यम से उनकी स्वायत्तता को मजबूत कर सकता है। प्रस्तुत अध्ययन दुर्ग जिले के विशेष संदर्भ में यह समझने का प्रयास करता है कि शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण ग्रामीण अनुसूचित जाति की महिलाओं की सामाजिक तथा राजनीतिक जागरूकता को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। अध्ययन वर्णनात्मक, अवधारणात्मक एवं समीक्षा-आधारित है तथा 2020 से 2024 के बीच प्रकाशित सरकारी प्रतिवेदनों, शोध-पत्रों और प्रासंगिक द्वितीयक सामग्री पर आधारित है। विश्लेषण से संकेत मिलता है कि शिक्षा और आर्थिक अवसरों का संयुक्त प्रभाव महिलाओं की निर्णय क्षमता, सरकारी योजनाओं की जानकारी, ग्राम सभा एवं स्थानीय शासन के प्रति रुचि, सामाजिक गतिशीलता और अधिकारों के प्रति चेतना को बढ़ा सकता है। फिर भी पितृसत्ता, जातिगत भेदभाव, अस्थिर रोजगार, डिजिटल अंतर, घरेलू कार्यभार और संसाधनों पर सीमित नियंत्रण जैसी बाधाएँ सशक्तिकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।




