डिजिटल वैश्वीकरण के दौर में भारतीय समाज एवं संस्कृति में परिवर्तन: एक वर्णनात्मक अध्ययन

Authors

  • सन्त कुमार शुक्ल शोधार्थी, (राजनीति विज्ञान विभाग), जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट (उ0प्र0)-210204 Author
  • डॉ. सुशील कुमार त्रिपाठी शोध निर्देशक, सहायक प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान विभाग), जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट (उ0प्र0)-210204 Author

Keywords:

डिजिटल वैश्वीकरण, भारतीय समाज, भारतीय संस्कृति, सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक परिवर्तन, सोशल मीडिया, उपभोक्तावाद, सांस्कृतिक पहचान।

Abstract

इक्कीसवीं शताब्दी में वैश्वीकरण का स्वरूप तीव्र गति से परिवर्तित हुआ है। इंटरनेट, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, सोशल मीडिया, डिजिटल भुगतान, ई-वाणिज्य, ऑनलाइन शिक्षा, ओटीटी प्लेटफॉर्म तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों के विस्तार ने वैश्वीकरण को एक नया डिजिटल आयाम प्रदान किया है। डिजिटल वैश्वीकरण ने भौगोलिक सीमाओं के महत्त्व को अपेक्षाकृत कम करते हुए विभिन्न समाजों और संस्कृतियों के मध्य संपर्क एवं अंतःक्रिया को व्यापक बनाया है। भारत जैसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता वाले देश में इस परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से दिखाई देता है।

प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य डिजिटल वैश्वीकरण के दौर में भारतीय समाज एवं संस्कृति में उत्पन्न प्रमुख परिवर्तनों का वर्णनात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन में विशेष रूप से सामाजिक जीवन, पारिवारिक संबंधों, युवा वर्ग, शिक्षा, भाषा, खान-पान, पहनावे, मनोरंजन, उपभोक्ता व्यवहार तथा सांस्कृतिक मूल्यों में आए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया है। डिजिटल माध्यमों ने एक ओर सूचना एवं ज्ञान तक पहुँच, संचार, शिक्षा, रोजगार तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं, वहीं दूसरी ओर उपभोक्तावाद, सांस्कृतिक एकरूपता, पारंपरिक मूल्यों में परिवर्तन, डिजिटल विभाजन तथा स्थानीय सांस्कृतिक पहचान से संबंधित चुनौतियों को भी जन्म दिया है।

यह अध्ययन वर्णनात्मक एवं द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है। अध्ययन के लिए पुस्तकों, शोध-पत्रों, शोध-प्रबंधों, विभिन्न रिपोर्टों एवं प्रासंगिक प्रकाशित सामग्री का उपयोग किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल वैश्वीकरण को केवल भारतीय संस्कृति के लिए चुनौती अथवा आधुनिकता के साधन के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इसके प्रभाव बहुआयामी हैं। भारतीय समाज वैश्विक प्रभावों को ग्रहण करते हुए स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं को भी नए रूप में अभिव्यक्त कर रहा है। अतः आवश्यकता इस बात की है कि तकनीकी एवं वैश्विक अवसरों का लाभ प्राप्त करते हुए भारतीय समाज की सांस्कृतिक विविधता, स्थानीय पहचान और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण के मध्य संतुलन स्थापित किया जाए।

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Published

2025-07-27

How to Cite

सन्त कुमार शुक्ल, & डॉ. सुशील कुमार त्रिपाठी. (2025). डिजिटल वैश्वीकरण के दौर में भारतीय समाज एवं संस्कृति में परिवर्तन: एक वर्णनात्मक अध्ययन. International Journal of Arts, Commerce & Education, 13(2), 50-61. https://avjournals.com/index.php/files/article/view/60